समस्तीपुर। स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी क्रम में स्नातक एमएलसी सर्वेश कुमार मंगलवार को समस्तीपुर जिले के खानपुर पहुंचे। हालांकि, निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बजाय वे करीब एक घंटे की देरी से पहुंचे। उनके इंतजार में बैठे लोगों और युवाओं में इस देरी को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली।

कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने मौजूदा स्नातक एमएलसी से उनके पिछले कार्यकाल को लेकर सीधे सवाल पूछे। युवाओं का कहना था कि जिस प्रतिनिधि को स्नातकों ने अपना वोट देकर विधान परिषद भेजा, उन्होंने छह वर्षों के दौरान क्षेत्र के स्नातक मतदाताओं से कितनी बार संवाद किया, इसका जवाब जनता जानना चाहती है।

युवाओं ने सवाल उठाया कि यदि सर्वेश कुमार पहले से ही स्नातक एमएलसी हैं, तो पिछले छह वर्षों में वे क्षेत्र के युवाओं के बीच कितनी बार पहुंचे? कितने बेरोजगार स्नातकों की समस्याएं विधान परिषद में उठाईं? युवाओं के रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने क्या ठोस पहल की?

कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने यहां तक सवाल कर दिया कि “आप पहले से एमएलसी हैं, छह साल कहां थे? दोबारा सिर्फ एक व्यक्ति को ही मौका क्यों मिले? आपने युवाओं के लिए आखिर किया क्या है?”युवाओं ने बिहार में बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े आंदोलनों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में स्नातक युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने वाले अभ्यर्थियों को कई बार पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में स्नातक मतदाताओं के प्रतिनिधि की भूमिका क्या रही, इसका हिसाब भी जनता जानना चाहती है।

युवाओं ने सवाल किया कि बिहार में कितने स्नातक बेरोजगार हैं, क्या उनके प्रतिनिधि के पास इसका कोई आंकड़ा है? रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे स्नातकों के लिए अब तक कौन-सी ठोस पहल की गई? इन सवालों पर कार्यक्रम में मौजूद युवाओं को अपेक्षित स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।

सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि छह वर्षों तक क्षेत्र से दूरी बनाए रखने के बाद चुनावी दौरे के समय मतदाताओं के बीच पहुंचना क्या पर्याप्त है? युवाओं की नाराजगी से साफ दिखा कि इस बार वे केवल भाषण और आश्वासन सुनने के बजाय अपने प्रतिनिधि से पिछले कार्यकाल का हिसाब मांगने के मूड में हैं।

कार्यक्रम में युवाओं के तीखे सवालों ने यह संकेत जरूर दिया कि आगामी स्नातक एमएलसी चुनाव में “काम का हिसाब” और “क्षेत्र में मौजूदगी” बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। हालांकि, सर्वेश कुमार की ओर से अपने पिछले कार्यकाल में किए गए कार्यों और युवाओं के सवालों पर उनका पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
