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लोकेशन, खानपुर समस्तीपुर।
धर्म विजय गुप्ता की रिपोर्ट।
समस्तीपुर/खानपुर। बिहार सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लेकिन समस्तीपुर जिले के खानपुर प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षण के दौरान कई केंद्रों पर अनियमितता सामने आने के बाद एक सेविका ने विभागीय स्तर पर अवैध वसूली किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है।

छह की संख्या में उपस्थित बच्चे।
बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा एवं समर्पण से जुड़े कार्यक्रम ‘आंगन का उत्साह’ के तहत पोषण मेला, गोद भराई, अन्नप्राशन एवं माता सम्मान सहित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया जा रहा है। इसी क्रम में वारिसनगर विधानसभा प्रभारी संजीव कुमार सिंह ने खानपुर प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान कई केंद्र नियमित रूप से नहीं खुलने, निर्धारित समय पर सेविका के उपस्थित नहीं रहने तथा सहायिका के अनुपस्थित रहने की बात सामने आई। कुछ केंद्रों पर बच्चों की वास्तविक उपस्थिति और रजिस्टर में दर्ज संख्या में भी अंतर पाए जाने का दावा किया गया।

कहीं आंगनबाड़ी केंद्र भवन में संचालित मिला तो कहीं निजी मकान अथवा करकट-फूस के दलान में केंद्र चलता पाया गया। कई केंद्रों पर बच्चों के नियमित वजन, ऊंचाई एवं वृद्धि की निगरानी को लेकर भी लापरवाही सामने आने की बात कही गई।

निरीक्षण के दौरान कुछ केंद्रों पर कुपोषित एवं अति-कुपोषित बच्चों की पहचान और रिकॉर्ड से संबंधित पंजी उपलब्ध नहीं होने का भी दावा किया गया। वहीं बच्चों के लिए खेल एवं शिक्षण सामग्री, बैठने की समुचित व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली, पंखा, वेंटिलेशन एवं साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव भी सामने आया।

नाश्ता और पोषाहार वितरण पर भी सवाल
निरीक्षण के दौरान कुछ सेविकाओं द्वारा बच्चों को सुबह का नाश्ता नहीं मिलने की बात सामने आने का दावा किया गया। पोषाहार की मात्रा और वितरण से संबंधित रिकॉर्ड भी निरीक्षण के दौरान उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात कही गई।

कई केंद्रों पर बच्चों की संख्या काफी कम पाई गई। कहीं करीब दस, कहीं छह तो कहीं 15 बच्चे ही उपस्थित मिले। बच्चों में आंगनबाड़ी केंद्र की निर्धारित पोशाक भी नजर नहीं आने की बात कही गई।

कुछ सेविकाओं ने बताया कि बच्चों को पोशाक करीब दो वर्ष पूर्व जीविका के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थी, जबकि कुछ ने लगभग छह माह पूर्व पोशाक मिलने की जानकारी दी। पोशाक की गुणवत्ता को लेकर भी सेविकाओं द्वारा नाराजगी जताए जाने की बात कही गई।

सेविका का गंभीर आरोप—‘टीएचआर की राशि में होती है वसूली’
निरीक्षण के दौरान एक आंगनबाड़ी सेविका ने कैमरे के सामने विभागीय व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। सेविका के अनुसार, टीएचआर मद में मिलने वाली करीब 13 से 14 हजार रुपये की राशि में से प्रत्येक माह लगभग तीन से चार हजार रुपये की कथित वसूली की जाती है।


231 केंद्रों के हिसाब से सालाना एक करोड़ से अधिक का दावा
निरीक्षणकर्ता संजीव कुमार सिंह ने सेविका के आरोप को गंभीर बताते हुए कहा कि खानपुर प्रखंड में कुल 231 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। यदि प्रत्येक केंद्र से तीन से चार हजार रुपये प्रतिमाह की कथित वसूली की जाती है तो यह राशि करीब 6.93 लाख से 9.24 लाख रुपये प्रतिमाह बैठती है।

केंद्र बंद पाया गया
इस हिसाब से सालाना कथित राशि लगभग 83 लाख से 1.11 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इसी आधार पर उन्होंने पूरे प्रखंड में सालाना करीब एक करोड़ दस लाख रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने का आरोप लगाया।उन्होंने आरोप लगाया कि यह कथित राशि सीडीपीओ स्तर से सेक्टरवार सेविकाओं एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं के माध्यम से वसूले जाने की बात कही जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।

‘ऑफिस में बैठकर जांच पूरी करने’ का आरोप
निरीक्षणकर्ता ने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी और जांच धरातल पर होने के बजाय कई बार कार्यालय में बैठकर ही पूरी कर दी जाती है। यदि नियमित निरीक्षण होता तो केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी, बच्चों की कम उपस्थिति, रजिस्टर एवं वास्तविक उपस्थिति में अंतर और अन्य अनियमितताओं की स्थिति सामने आती।

केंद्र बंद पाया गया
उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, कथित अवैध वसूली की जांच तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
अब सवाल यह है कि यदि सेविका द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं तो इतने बड़े स्तर पर कथित वसूली का जिम्मेदार कौन है? क्या विभागीय स्तर पर इसकी नियमित निगरानी होती है? क्या टीएचआर की राशि और अन्य मदों का वास्तविक उपयोग केंद्रों तक पहुंच रहा है? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
