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लोकेशन, खानपुर समस्तीपुर।
धर्म विजय गुप्ता की रिपोर्ट।
समस्तीपुर / खानपुर प्रखंड क्षेत्र स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय टेढ़ा मिल्की में मध्याह्न भोजन योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विद्यालय में एमडीएम के लिए उपलब्ध कराए गए चावल की मात्रा में कथित कमी, बच्चों की संख्या के अनुपात में कम भोजन तैयार करने, भोजन की गुणवत्ता और विद्यालय की साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर सामाजिक न्याय समिति, खानपुर के अध्यक्ष सह उप प्रमुख अमरेंद्र कुमार यादव ने बीडीओ को लिखित आवेदन देकर जांच की मांग की है।
राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय टेढ़ा मिल्की
1 अक्टूबर 2026 को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय को 12 क्विंटल 50 किलो यानी 25 बोरी चावल उपलब्ध कराया गया था, लेकिन विद्यालय में कथित रूप से 20 बोरी यानी 10 क्विंटल चावल ही मौजूद मिला। आवेदन में शेष पांच बोरी चावल के कथित रूप से बेच दिए जाने की आशंका जताई गई है।

25 बोरी चावल आया तो पांच बोरी कहां गया?आवेदन में चावल के स्टॉक को लेकर सबसे बड़ा सवाल उठाया गया है। उप प्रमुख का कहना है कि विद्यालय को उपलब्ध कराए गए चावल और मौके पर मौजूद स्टॉक में अंतर है। इसी आधार पर उन्होंने एमडीएम स्टॉक पंजी, चावल प्राप्ति एवं खपत का रिकॉर्ड और संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।

आवेदक का आरोप है कि विद्यालय में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति के अनुपात में भोजन तैयार नहीं किया जाता है। आवेदन में दावा किया गया है कि जहां करीब 40 किलो चावल तैयार किया जाना चाहिए, वहां कथित रूप से 20 से 25 किलो चावल ही पकाया जाता है।

बच्चों की थाली में भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल
मामला सिर्फ चावल के स्टॉक तक सीमित नहीं है। आवेदन में विद्यालय के बच्चों से भोजन की गुणवत्ता को लेकर पूछताछ किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। कुछ बच्चों द्वारा भोजन में दाल से कथित रूप से कीड़े निकलने की शिकायत किए जाने की बात कही गई है।


शौचालय और सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
विद्यालय की साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी शिकायत की गई है। आवेदन के अनुसार, विद्यालय के शौचालय में लंबे समय से समुचित सफाई नहीं होने के कारण गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी हुई है।

आवेदक का कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण को देखते हुए शौचालय एवं परिसर की नियमित साफ-सफाई जरूरी है।
स्टॉक पंजी नहीं दिखाने का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एमडीएम से संबंधित स्टॉक पंजी जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में विद्यालय को प्राप्त चावल, प्रतिदिन की खपत और शेष खाद्यान्न का मिलान कैसे हुआ, इसे लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।उप प्रमुख ने बीडीओ से विद्यालय में उपलब्ध अभिलेखों का भौतिक स्टॉक से मिलान कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एमडीएम के लिए प्राप्त खाद्यान्न का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं।

विद्यालय प्रबंधन पर भी लगाए गए आरोप
आवेदन में विद्यालय की व्यवस्था को लेकर प्रधानाध्यापिका और रसोइया की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आवेदक ने एमडीएम के चावल में कथित अनियमितता के लिए विद्यालय प्रबंधन की मिलीभगत का आरोप लगाया है।

इसके अलावा आवेदन में प्रधानाध्यापिका के पति के विद्यालय की व्यवस्था में कथित हस्तक्षेप का भी उल्लेख किया गया है। अभिभावकों द्वारा विद्यालय की व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने पर कथित रूप से अमर्यादित भाषा का प्रयोग किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
मामला सरकारी विद्यालय में बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन से जुड़ा होने के कारण शिकायत को गंभीर माना जा रहा है। अब निगाहें प्रखंड प्रशासन की जांच पर टिकी हैं।

