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लोकेशन, समस्तीपुर
धर्म विजय गुप्ता की रिपोर्ट।
समस्तीपुर। खानपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत राज दिनमनपुर दक्षिणी के वार्ड संख्या 12 में सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मजदूरों की जियोटैगिंग उपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वार्ड संख्या 12 में रामाश्रय झा के घर के निकट से सरोज झा के घर तक कराए जा रहे पीसीसी सड़क निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों की अनदेखी और अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया गया है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, सड़क की ढलाई आठ इंच होनी चाहिए, जबकि मौके पर कई हिस्सों में महज दो से ढाई इंच ढलाई किए जाने की बात कही जा रही है। यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है, तो निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल उठेंगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त सड़क का निर्माण विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के तहत कराया जा रहा है। आरोप है कि सड़क पर वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होने से करीब दस दिन पहले से ही लगभग 70 मजदूरों की जियोटैगिंग के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की जा रही थी, जबकि उस समय धरातल पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कार्यस्थल पर काम शुरू ही नहीं हुआ था, तो मजदूरों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई?

निर्माण स्थल पर कम मजदूर, लेकिन जियोटैगिंग में दर्जनों की उपस्थिति!
रविवार को जब उक्त सड़क पर पीसीसी निर्माण कार्य शुरू हुआ, तो मौके पर बाहर के सात से आठ पुरुष मजदूरों के काम करने की जानकारी सामने आई। वहीं, आरोप है कि कार्य करा रहे ठेकेदार मनोरंजन कुमार द्वारा दर्जनों महिला और पुरुषों को एकत्रित कर उनकी जियोटैगिंग कराई गई। इस स्थिति ने मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, कार्य दिवसों के रिकॉर्ड और योजना के तहत होने वाले भुगतान की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, जियोटैगिंग रिकॉर्ड और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रोजगार सेवक और जेई ने नहीं उठाया फोन!
मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए पंचायत रोजगार सेवक अशोक पासवान को कई बार फोन किया गया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसी तरह संबंधित विभाग के जेई एहतराम करीमी से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाने के कारण निर्माण कार्य की स्वीकृत योजना, निर्धारित मोटाई, मजदूरों की उपस्थिति और कार्य की गुणवत्ता को लेकर उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।

सदर एसडीओ ने दिया जांच और कार्रवाई का भरोसा
मामले की जानकारी सदर एसडीओ को दिए जाने पर उन्होंने बताया कि कार्य रोकने के लिए बीडीओ को कहा जा रहा है। साथ ही, मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता, ढलाई की वास्तविक मोटाई, मजदूरों की जियोटैगिंग उपस्थिति और योजना से जुड़े अभिलेखों की जांच कब तक करता है।

जांच के घेरे में निर्माण कार्य और मजदूरों की हाजिरी
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सड़क निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है? क्या कार्य शुरू होने से पहले दर्ज की गई मजदूरों की उपस्थिति वास्तविक थी? क्या जियोटैगिंग और मस्टर रोल के रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन किया गया है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है।

अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का उल्लंघन या मजदूरों की उपस्थिति में गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ गांवों में टिकाऊ आधारभूत संरचना विकसित करना है। ऐसे में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और मजदूरों की उपस्थिति में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
