लोकेशन, खानपुर समस्तीपुर।
रिपोर्ट, धर्म विजय प्रसाद गुप्ता बिहार हेड,(बहती गंगा)
समस्तीपुर/खानपुर। प्रखंड क्षेत्र में उर्वरक की बिक्री, निर्धारित एमआरपी, थोक विक्रेताओं से खाद की आपूर्ति और डिजिटल बिक्री व्यवस्था को लेकर खुदरा उर्वरक विक्रेताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में खाद विकास संघ, खानपुर ने 14 सितंबर 2026 को प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी एवं जिला प्रशासन को संबोधित ज्ञापन जारी कर अपनी समस्याओं और मांगों को सार्वजनिक किया है।संघ की ओर से जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि थोक विक्रेताओं द्वारा निर्धारित एमआरपी पर उर्वरक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। साथ ही आवश्यक उत्पादों की जबरन टैगिंग तथा दुकानों तक डोर-स्टेप डिलीवरी की कमी के कारण खुदरा विक्रेताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संघ का कहना है कि एक ओर किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर खुदरा विक्रेताओं को खाद की आपूर्ति ही उचित दर पर नहीं हो पा रही है।

संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप बिक्री नहीं होने पर पदाधिकारियों द्वारा लाइसेंस रद्द करने और दुकान सील करने की कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। विक्रेताओं का कहना है कि इसी परिस्थिति ने उन्हें संगठित होकर अपनी समस्याएं उठाने के लिए मजबूर किया है।ज्ञापन में संघ ने एकजुटता का संकल्प लेते हुए कहा है कि सभी सदस्य संघ के निर्णयों और अभियानों में साथ रहेंगे। पत्र में 15 अक्टूबर 2026 तक अथवा अगले आदेश तक खाद का उठाव नहीं करने की चेतावनी भी दी गई है, साथ ही कहा गया है कि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होने पर संघ आगे कदम उठाएगा।इधर, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि खाद की उपलब्धता और कीमत को लेकर किसान तथा खुदरा विक्रेता दोनों परेशान हैं और सरकार को समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

बिहार में उर्वरक की बिक्री को लेकर अगस्त-सितंबर में सरकार ने डिजिटल व्यवस्था, निर्धारित दर पर बिक्री तथा टैगिंग रोकने जैसे कदमों की घोषणा की है। कृषि विभाग की ओर से निर्धारित दर से अधिक कीमत, कालाबाजारी और अनियमितता पर कार्रवाई की बात भी कही गई है। वहीं समस्तीपुर में किसानों और उर्वरक विक्रेताओं की ओर से डिजिटल व्यवस्था, कालाबाजारी और कीमत से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की हालिया रिपोर्टें भी सामने आई हैं।
खुदरा विक्रेताओं की मुख्य मांग है कि थोक स्तर पर खाद उचित दर पर उपलब्ध कराई जाए, जबरन टैगिंग पर रोक लगे, डोर-स्टेप डिलीवरी सुनिश्चित हो और किसानों को बिना अनावश्यक तकनीकी परेशानी के समय पर निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।संघ ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसानों और खुदरा विक्रेताओं के बीच टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कराना है जिसमें किसानों को समय पर उचित दर पर खाद मिले और खुदरा विक्रेताओं को भी नियमानुसार कारोबार करने में परेशानी न हो।संघ के पदाधिकारियों में प्रखंड अध्यक्ष अरविंद कुमार बिहारी, सचिव देवानंद पाठक एवं कोषाध्यक्ष रामनरेश प्रसाद के नाम पत्र में दर्ज हैं।

पृष्ठभूमि: समस्तीपुर जिले में उर्वरक की कीमत और आपूर्ति को लेकर खुदरा विक्रेताओं की बैठक में भी यह सवाल उठ चुका है कि यदि उन्हें थोक स्तर पर निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद मिलेगी तो सरकारी दर पर बिक्री कैसे संभव होगी।
