बिहार हेड, धर्म विजय प्रसाद गुप्ता
समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले के खानपुर प्रखंड अंतर्गत श्रीपुरगाहर पूर्वी पंचायत के पंचायत सरकार भवन से कथित तौर पर सरकारी उपयोग में रखे सामान को पिकअप वैन पर लादकर ले जाने का मामला सामने आया है। रविवार को करीब 11 बजे पंचायत भवन से कुर्सी, टेबल, बेंच, डेस्क, गोदरेज सहित अन्य सामान पिकअप पर लादे जाने के दौरान ग्रामीणों ने वाहन को रोक लिया। इसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पिकअप वैन एवं उस पर लदे सामान के संबंध में पूछताछ शुरू कर दी।ग्रामीणों के मुताबिक, पंचायत सरकार भवन परिसर में रखे सरकारी सामान को तीन-चार युवक पिकअप वैन पर लाद रहे थे। इसी दौरान आसपास के ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली। ग्रामीण मौके पर पहुंचे और युवकों से सामान पंचायत भवन से बाहर ले जाने का कारण पूछा। पूछताछ के दौरान युवकों ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें पंचायत भवन से सामान निकालकर ले जाने के लिए मुखिया की ओर से कहा गया था।

ग्रामीणों का कहना है कि सामान लोड कर रहे युवकों ने मुखिया पुत्र मोनू कुमार साहनी का नाम लेते हुए उनके निर्देश पर सामान ले जाने की बात कही। इस संबंध में हुई बातचीत का वीडियो भी ग्रामीणों के पास होने की बात सामने आई है। हालांकि, सामान को पंचायत भवन से बाहर ले जाने के लिए कोई वैध सरकारी आदेश, अनुमति अथवा अधिकृत प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं, यह जांच का विषय है।

घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश देखा गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सरकार भवन में रखी सरकारी संपत्ति आम जनता और पंचायत के कार्यों के लिए होती है। ऐसे में यदि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति अथवा निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के सरकारी सामान को निजी वाहन से बाहर ले जाया जा रहा था, तो यह गंभीर प्रशासनिक मामला हो सकता है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीण विनय कुमार झा उर्फ टनटन झा ने कहा कि पंचायत भवन में रखी सरकारी संपत्ति किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है। सरकारी सामान को बिना स्पष्ट आदेश और प्रक्रिया के पंचायत भवन से बाहर ले जाना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में सरकारी संपत्ति को अनधिकृत तरीके से हटाने या ले जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर उठे सवाल।इस घटना ने पंचायत स्तर पर सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और उनके रख-रखाव को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत सरकार भवन में रखी कुर्सी, टेबल, बेंच, डेस्क, अलमारी समेत अन्य सामग्री सरकारी राशि से खरीदी जाती है और उसका उपयोग पंचायत के प्रशासनिक एवं जनहित के कार्यों में किया जाना होता है। इसलिए सरकारी संपत्ति को बिना अधिकृत अनुमति के कहीं ले जाना या उसका निजी उपयोग करना गंभीर मामला माना जा सकता है।
हालांकि, इस मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पिकअप पर लादा जा रहा सामान कब, किस आदेश के तहत और किस उद्देश्य से पंचायत भवन से बाहर भेजा जा रहा था। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

अधिकारी ने कहा—जांच के बाद होगी कार्रवाई,मामले की जानकारी मिलने पर पंचायती राज पदाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि उन्हें प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से घटना की जानकारी मिली है। मामले की जांच की जाएगी और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी सामान को किस आदेश अथवा प्रक्रिया के तहत पंचायत भवन से बाहर ले जाया जा रहा था, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

मुखिया पुत्र ने बताया—सामान बदलने के लिए भेजा जा रहा था,वहीं, इस संबंध में मुखिया पुत्र मोनू कुमार साहनी से फोन पर जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि पंचायत भवन का सामान बदलने के लिए बेगूसराय स्थित कंपनी को भेजा जा रहा था।अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या उक्त सामान को पंचायत भवन से बाहर भेजने के लिए सक्षम स्तर से विधिवत अनुमति ली गई थी और क्या सामान को कंपनी तक भेजने की कोई आधिकारिक प्रक्रिया एवं दस्तावेज मौजूद हैं।जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर,फिलहाल पिकअप वैन को ग्रामीणों द्वारा पकड़कर पुलिस को सौंपे जाने के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। पुलिस और संबंधित विभागीय अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि पिकअप पर लदा सामान वास्तव में पंचायत सरकार भवन की सरकारी संपत्ति था या उसे नियमानुसार बदलने/मरम्मत के लिए भेजा जा रहा था।यदि जांच में सरकारी संपत्ति को बिना अनुमति अथवा निर्धारित प्रक्रिया के हटाने या ले जाने की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और गंभीर अनियमितता का मामला बन सकता है। सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित पंचायत एवं अधिकारियों की होती है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि सरकारी संपत्तियों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनधिकृत हस्तक्षेप पर रोक लग सके।फिलहाल पुलिस एवं प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत भवन से सामान ले जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।
